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वर्द्धन वंश




हर्षवर्द्धन, बाणभट्ट, हर्षचरित, ह्वेनसांग

गुप्तोत्तर काल में कई राजवंशों का उदय हुआ जिनमें वर्द्धन वंश भी महत्वपूर्ण है. वर्द्धन वंश की राजधानी थानेश्वर थी. इस वंश में महान शासक हर्षवर्द्धन हुआ. हर्षवर्द्धन के बारे में जानकारी निम्न प्रकार है :

    हर्षवर्द्धन    


हर्षवर्द्धन 16 वर्ष की आयु में राजगद्दी पर बैठा.  
उसने शिलादित्य की उपाधि ग्रहण की.
हर्षवर्द्धन नें अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित की थी.
हर्षवर्द्धन द्वारा रचित नाटक : नागानन्द, रत्नावली और प्रियदर्शिका.
बाणभट्ट, हर्षवर्द्धन का राजकवि था. उसने हर्षचरित की रचना की थी.
चीनी यात्री ह्वेनसांग, हर्षवर्द्धन के समय भारत आया था. उसने सी-यू-की की रचना की थी.   

पाल वंश



paal vansh, पाल वंश, धर्मपाल, देवपाल, विक्रमशिला विश्वविद्यालय
पाल वंश की स्थापना गोपाल ने 750 ई. में की थी. गोपाल, बौद्ध धर्म का अनुयायी था. पाल वंश से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्न प्रकार हैं.


सस्थापक : गोपाल
राजधानी : मुंगेर
प्रमुख शासक : धर्मपाल, देवपाल
धर्मपाल ने विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी.
गोपाल बौद्ध धर्म का अनुयायी था.

गुप्त साम्राज्य



Indian History Part : 10 (Gupt Destiny)


240 ई. में गुप्त वंश की स्थापना श्रीगुप्त नें की थी. भारत के इतिहास में गुप्त काल को स्वर्ण काल के नाम से जाना जाता है. गुप्त काल में भारतीय समाज काफी उन्नत अवस्था में था. इस समय समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त द्वितीय जैसे महत्वपूर्ण शासक हुए. गुप्त साम्राज्य का विवरण निम्न प्रकार है.


  #  श्रीगुप्त   


गुप्त वंश की स्थापना 240 ई. में श्रीगुप्त नें की थी.

  #  चन्द्रगुप्त प्रथम  


गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक चन्द्रगुप्त को ही माना जाता है.
चन्द्रगुप्त प्रथम नें 369 ई. में गुप्त संवत् आरम्भ किया था.

  #  समुद्रगुप्त  


यह चन्द्रगुप्त प्रथम का पुत्र था.
स्मिथ नें इसे भारत का नेपोलियन भी कहा है.   
समुद्रगुप्त की मुद्राओं पर वीणा वादन दिखाया गया है.
समुद्रगुप्त की विजयों का विवरण काव्य प्रशस्ति (प्रयाग प्रशस्ति) से मिलता है. इसे हरिषेण नें उत्कीर्ण किया था.

  #  चन्द्रगुप्त द्वितीय (चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य)  


चन्द्रगुप्त द्वितीय को विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है.  
चीनी यात्री फाह्यान इसके समय में भारत आया था तथा उसने फ़ो-क्यो-की नामक पुस्तक लिखी थी.  
इसके दरबार में नौ विद्वानों की मण्डली थी जिसे "नवरत्न" कहा जाता था.  
कालिदास इसके नवरत्नों में कवि तथा लेखक था जिसने विक्रम और उर्वशी की प्रेमकथा विक्रमोर्वशीय की रचना संस्कृत में की थी.   
इसके अलावा धन्वन्तरी, वराहमिहिर (खगोलशास्त्री तथा प्रसिद्ध गणितज्ञ), क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, घटकर्पर तथा वेताल भट्ट इसके दरबारी थे.
शक विजय के बाद विक्रमादित्य नें शकारि की उपाधि ग्रहण की तथा महरौली (नई दिल्ली) में लौह स्तम्भ भी खुदवाया था.

  #  कुमारगुप्त प्रथम  


गुप्त शासकों में सर्वाधिक अभिलेख कुमारगुप्त प्रथम के प्राप्त हुए हैं.
इसके शासनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी.

  #  स्कन्दगुप्त  


इसके शासनकाल में हूणों का आक्रमण हुआ था.

  #  कुमारगुप्त तृतीय  


यह गुप्त वंश का अंतिम महान शासक था.
अंतिम गुप्त शासक विष्णुगुप्त तृतीय था. 

दक्षिणी भारत के प्रमुख राजवंश

भारत का इतिहास भाग : 8 (दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंश)


दक्षिणी भारत के प्रमुख राजवंशों में चेर, चोल तथा पाण्ड्य वंश हैं. पाण्ड्य राजाओं के संरक्षण में रहने वाले कवि तथा विद्वानों की मण्डली को संगम कहा जाता था.

  #  चोल राज्य  


यह सबसे संगमकालीन सबसे प्राचीन राज्य था.
राजधानी : कुहार अथवा कावेरीपत्तनम
प्रतीकचिह्न : बाघ
प्रमुख शासक : करिकाल

  #  चेर राज्य  


प्रथम चेर शासक उदायिनजेरल था.
राजधानी : वान्जि (कोरकई)
प्रतीक चिह्न : धनुष
प्रमुख शासक : शेनगुट्टवन (यह "लाल चेर" के नाम से जाना जाता है.)

  #  पाण्ड्य राज्य  


 पाण्ड्य राज्य सुदूर दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व में थे.
राजधानी : मदुरै
प्रतीक चिह्न : मछली
प्रमुख शासक : पलशाले मुदुकुडुमी  

Note : इस टॉपिक से प्रमुख शासक तथा सम्बन्धित वंश के कई बार प्रश्न पूछे गये हैं.
Trick : बाघ ने चोला पहन कर धनुष से चेरी तोड़ी.
           चोल वंश : बाघ
           चेर वंश : धनुष
           पाण्ड्य वंश : मछली

मौर्योत्तर काल में विदेशी आक्रमण


भारत का इतिहास भाग : 8 (भारत पर विदेशी आक्रमण)


मौर्य साम्राज्य के अंतिम शासक बृहदृथ के समय कुछ यूनानियों का भारत पर सर्वप्रथम आक्रमण हुआ था. भारत पर सर्वप्रथम बेक्ट्रिया के यवनों नें आक्रमण किया था तथा यवन शासक डेमिट्रीयस को प्रथम आक्रमणकारी माना जाता है.

  #  हिन्द-यूनानी (इंडो-ग्रीक)  


भारत में प्रवेश करने वाला प्रथम विदेशी आक्रमणकारी युथेडेमस वंश का डेमिट्रीयस प्रथम था.
सबसे प्रसिद्ध यवन शासक मीनान्डर था. बौद्ध साहित्य में उसे "मिलिंद" के नाम से जाना जाता है.
युथेडेमस वंश के डेमिट्रीयस प्रथम नें साकल को अपनी राजधानी बनाया था. 
यवन शासक यूक्रेटाइड नें भारत के कुछ हिस्सों को जीतकर तक्षशिला को अपनी राजधानी बनाया था.  
भारत में सर्वप्रथम सोने के सिक्के यवन शासकों नें चलाये थे.


  #  शक  


शकों को सिथियन भी कहा जाता है.
पश्चिमोत्तर भारत के शकों को क्षत्रप भी कहा जाता है.
रुद्रदामन प्रथम शकों का सबसे प्रसिद्ध शासक था.
चन्द्रगुप्त द्वितीय नें शकों को परास्त करके भगा दिया था तथा शक विजय के उपलक्ष में विक्रम संवत प्रारम्भ किया था.

  #  पह्ल्व  


शकों के बाद पह्ल्व भारत में आये.
इनका मूल स्थान ईरान था.
पह्ल्व वंश का संस्थापक मिथ्रेडेट्स प्रथम था.
गोंदोफर्निश इस वंश का महान शासक था.
इनके समय में सेण्ट थॉमस ईसाई धर्म का प्रचार करने भारत आया था.

  #  कुषाण वंश   


 इस वंश का संस्थापक कुजुल कडफिसस था. 
इस वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक कनिष्क था.

कनिष्क

 

यह बौद्ध धर्म का अनुयायी था तथा इसने बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय का प्रचार किया था.     
कनिष्क नें 78 ई. में शक संवत् प्रारम्भ किया था.   
चरक-संहिता की रचना करने वाले चरक इसके राजवैध थे.
इसके समय ही वात्स्यायन नें कामसूत्र की रचना की थी.       

भारत का इतिहास : आन्ध्र-सातवाहन वंश

भारत का इतिहास : आंध्र-सातवाहन वंश

इस वंश की स्थापना तीसरी सदी में सिमुक द्वारा की गयी थी.
उसे आंध्र भी कहा जाता है.
गौतमी पुत्र शातकर्णी इस वंश का महान् शासक था.
शातकर्णी नें कार्ले में चैत्य मंदिर तथा अमरावती स्तूप का निर्माण करवाया था.
इनकी राजकीय भाषा प्राकृत थी.
इनकी लिपि ब्राह्मी थी.
इस वंश के शासकों नें तांबे तथा कांसे के अलावा सीसे के सिक्के भी जारी करवाए थे.

मौर्य साम्राज्य

मौर्य साम्राज्य
नन्द वंश के शासक घननन्द नें एक चाणक्य का अपमान किया था जिससे रुष्ट होकर चाणक्य नें नन्द वंश को समूल नष्ट करने की प्रतिज्ञा की थी. इसके बाद चाणक्य नें एक युवक चन्द्रगुप्त को सैन्य प्रशिक्षण दिया. बाद में 321 ई.पू. में अपने गुरू चाणक्य की सहायता से चन्द्रगुप्त मौर्य नें मगध पर मौर्य वंश की स्थापना की. मौर्य वंश मगध पर शासन करने वाला सबसे शक्तिशाली राजवंश था.

 मौर्य वंश के महत्वपूर्ण शासक निम्न हैं :

1. चन्द्रगुप्त मौर्य


-  मौर्य वंश का संस्थापक था. 
-  सुदूर दक्षिण भारत को छोड़कर शेष भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश का सम्पूर्ण क्षेत्र इसके अधिकार में था.
-  इसनें 305 ई.पू. में सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस को हराया था.
-  मेगस्थनीज, सेल्यूकस का राजदूत था. जो चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में रहा था.
-  मेगस्थनीज नें इंडिका नामक पुस्तक की रचना की जिसमें मौर्ययुगीन समाज का वर्णन है.
-  चन्द्रगुप्त मौर्य जैन धर्म का अनुयायी था तथा इसनें अपना अंतिम समय श्रवणबेलगोला (मैसूर) में बिताया था.

2. बिन्दुसार


-  चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु के बाद उसका पुत्र बिन्दुसार शासक बना.
-  इसके शासनकाल में तक्षशिला में दो विद्रोह हुए थे जिन्हें दबाने के लिए उसने पहले सुसीम तथा बाद में अशोक को भेजा था.
-  सीरिया के शासक एंटीयोकस I नें डायमेकस को बिन्दुसार के दरबार में भेजा था.
-  मिस्र के शासक टोलेमी नें डायनिसस को बिन्दुसार के दरबार में भेज था.

3. अशोक


-  269 ई.पू. में अशोक मगध की राजगद्दी पर बैठा.
-  राजगद्दी पर बैठने से पहले वह अवन्ती का राज्यपाल था.
-  261 ई.पू. कलिंग युद्ध में हुए रक्तपात से दु:खी होकर अशोक नें बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया तथा फिर कभी युद्ध न करने की प्रतिज्ञा की.
-  अशोक ने साँची के स्तूप का निर्माण करवाया था.
-  उसने अपने पुत्र महेंद्र तथा पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए श्रीलंका भेजा था.
-  अशोक के अभिलेखों की लिपि ब्राह्मी है तथा इसके अभिलेखों को सर्वप्रथम 1837 ई. में जेम्स प्रिन्सेप नें पढ़ा था.

मगध एक शक्तिशाली राज्य


मगध एक शक्तिशाली राज्य तथा इसके राजवंश

छठी शताब्दी ई.पू. में मगध एक शक्तिशाली राज्य बनकर उभरा. इसे सर्वप्रथम हर्यक वंश के समय शक्तिशाली राज्य के रूप में माना जाने लगा था. इसके बाद इस पर शिशुनाग वंश, नन्द वंश तथा मौर्य वंश जैसे कुछ शक्तिशाली तथा महान वंशों नें शासन किया था. मगध पर शासन करने वाले कुछ महत्वपूर्ण वंश निम्न प्रकार हैं.


1. हर्यक वंश (544-412 ई.पू.)


मगध पर शासन करने वाला प्रथम महान वंश था. हर्यक वंश के कुछ महत्वपूर्ण शासक निम्न प्रकार हैं :

#  बिम्बिसार :


-  इसने हर्यक वंश की स्थापना की थी.
-  इसकी राजधानी गिरिव्रज थी.
-  इसका उपनाम श्रेणिक था.
-  बिम्बिसार नें वैवाहिक सम्बन्धों से अपने साम्राज्य का विस्तार किया.


#  अजातशत्रु :


-  यह बिम्बिसार का पुत्र था.
-  इसका उपनाम कुणिक था.
-  यह बौद्ध धर्म का अनुयायी था.
-  प्रथम बौद्ध महासंगीती का आयोजन आजातशत्रु के समय राजगृह में किया गया था.

#  उदायिन :


-  यह अजातशत्रु का पुत्र था.
-  इसनें पाटलिपुत्र की स्थापना की थी.

# नागदशक :


-  यह हर्यक वंश का अंतिम शासक था.

2. शिशुनाग वंश (412-344 ई.पू.)


-  नागदशक को हराकर शिशुनाग नें मगध में शिशुनाग वंश की स्थापना की थी.
-  इस वंश का अंतिम शासक नन्दिवर्धन था.

3. नन्द वंश (344-324 ई.पू.)


-  इस वंश की स्थापना महापद्मनंद नें की थी.
-  इस वंश का अंतिम शासक घननन्द था.
-  वह सिकंदर का समकालीन था.
-  इसने चाणक्य का अपमान किया था. जिसके बाद चाणक्य नें नन्द वंश को समूल नष्ट करने की प्रतिज्ञा की थी.


4. मौर्य वंश (321-184 ई.पू.)


यह मगध पर शासन करने वाला सबसे शक्तिशाली राजवंश था. चाणक्य की सहायता से चन्द्रगुप्त मौर्य नें नन्द वंश के अंतिम शासक घननन्द को हराकर मौर्य वंश की स्थापना की थी. मौर्य वंश के बारे में विस्तार से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें

5. शुंग वंश


-  इस वंश का संस्थापक पुष्यमित्र शुंग था.
-  इसके समय भागवत धर्म के प्रसार का विवरण मिलता है.

भारत का इतिहास : महाजनपदों का उदय



भारत का इतिहास : महाजनपदों का उदय

उत्तर वैदिक काल में धीरे-धीरे राजतंत्र शासन का आधार बना तथा जनपदों का उदय हुआ. 6ठी शताब्दी ई.पू. में भारत में निम्न 16 जनपदों का उदय हुआ था.


1. अंग 

 

-  इसकी राजधानी चम्पा थी.
-  क्षेत्र : बिहार का भागलपुर तथा मुंगेर

2. काशी 


-  इसकी राजधानी वाराणसी थी.
-  क्षेत्र : उत्तरप्रदेश के वाराणसी के आस-पास का क्षेत्र  

3. मगध


-  इसकी राजधानी गिरिव्रज थी जिसे बाद में राजगृह स्थानांतरित कर दिया गया.
-  क्षेत्र : बिहार का पटना तथा गया का क्षेत्र

4. वत्स


-  इसकी राजधानी कौशाम्बी थी.
-  क्षेत्र : उत्तरप्रदेश का इलाहाबाद


5. वज्जि


-  इसकी राजधानी वैशाली थी.
-  क्षेत्र : उत्तरप्रदेश का मुजफ्फरपुर का क्षेत्र

 6. कोसल


-  इसकी राजधानी श्रावस्ती थी.
-  क्षेत्र : फैजाबाद 

भारत का इतिहास : टॉपिक्स लिस्ट

bharat ka itihas topic listभारत के इतिहास को तीन भागों में बांटा जा सकता है :
(i)    प्राचीन भारत का इतिहास
(ii)   मध्यकाल का इतिहास
(iii)  आधुनिक भारत का इतिहास




1. प्राचीन भारत का इतिहास

प्राचीन भारत के इतिहास को दो भागों में बांटा जा सकता है :
1. प्रागैतिहासिक काल : वह समय जिसके बारे में कोई लिखित जानकारी प्राप्त नहीं होती है. इसके बारे में काफी कम जानकारी प्राप्त है. इस समय के इतिहास के बारे में केवल कुछ पुरातात्विक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त की जा सकती है. प्रारम्भिक समय में मानव को न तो भाषा का ज्ञान था और न ही लिपि का, ऐसा मानव केवल अपनी भूख शांत करने तथा खुद को रखने तक की ही क्रिया में सलंग्न रहा था. प्रारम्भ में इंसान जानवरों को मारकर उनका मांस खाकर ही जीवित रहता था तथा शिकार के लिए उसने धीरे-धीरे पत्थरों को नुकीला करके औजार बनाने सीखे थे.
प्रागैतिहासिक काल को तीन भागों में बांटा गया है.

-  पुरापाषाण काल
 -  मध्यपाषण काल
 -  नवपाषाण काल
2.  ऐतिहासिक काल : जिस काल के बारे में पर्याप्त साहित्यिक तथा पुरातात्विक जानकारी उपलब्ध है उसे ऐतिहासिक काल कहा गया है.  
इसे निम्न दो भागों में बांटा जा सकता है : 
-  सिन्धु घाटी सभ्यता (2500 ई.पू. से 1750 ई.पू.) 
-  वैदिक काल : (i) ऋग्वैदिक काल  (ii) उत्तर वैदिक काल

2. मध्यकालीन भारत का इतिहास


भारत पर अरबों के आक्रमण के बाद का समय मध्यकाल का समय माना जाता है. इस समय में अधिकांशतः विदेशियों नें भारत पर शासन किया.
मध्यकालीन भारत के इतिहास के मुख्य बिंदु निम्न हैं.


#  विदेशी आक्रमण
-  महमूद गजनवी  
-  मुहम्मद गौरी 

#  दिल्ली सल्तनत


-  गुलाम वंश  
-  खिलजी वंश  
-  तुगलक वंश  
-  सैयद वंश  
-  लोदी वंश  
-  मुगल साम्राज्य 
#  उत्तरवर्ती राजवंश



#  मराठा साम्राज्य 

3. आधुनिक भारत का इतिहास

 

मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद तथा अंग्रेजों के शासन काल का समय आधुनिक भारत के इतिहास का समय माना जाता है. आधुनिक भारत के इतिहास के मुख्य बिंदु निम्न हैं :

-  भारत में यूरोप की व्यापारिक कम्पनियों का आगमन 
-  प्लासी का युद्ध  
-  बक्सर का युद्ध   
-  बंगाल तथा बंगाल के गवर्नर  
-  भारत के गवर्नर जनरल  
-  1857 की क्रांति  
-  भारत के वायसराय  
-  सामाजिक व धार्मिक सुधार आन्दोलन  
-  राष्ट्रीय आन्दोलन  
-  भारत में संवैधानिक विकास